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बुलडोजर्स के साथ हमारे इलाके में घुसे थे भारत के 400 जवान: डोकलाम पर चीन

Aug. 2, 2017, 6:23 p.m.
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नई दिल्ली.चीन ने डोकलाम विवाद पर 15 पेज और 2500 शब्दों का बयान जारी किया है। उसने आरोप लगाया है कि जून में 400 जवान उसके इलाके में रोड कंस्ट्रक्शन रोकने के लिए घुस आए थे। भारतीय जवानों ने वहां तंबू गाड़ दिए थे। चीन का दावा है कि अभी भी भारत के 40 सैनिक और एक बुलडोजर उसके इलाके में मौजूद है। चीन ने भारत से कहा है कि भूटान तो बहाना है। उसके बहाने भारत दखल दे रहा है। उसे तुरंत और बिना शर्त वहां से अपने सैनिक हटा लेने चाहिए। और क्या कहा चीन ने...

1) डोकलाम चीन का हिस्सा
- चीन ने कहा, “1890 में चीन और यूके (तब भारत में ब्रिटिश हुकूमत थी) के बीच एक करार हुआ था। इसके मुताबिक, डोकलाम एरिया बिना किसी विवाद के चीन का हिस्सा माना गया था। चीन में पीपुल्स रिपब्लिक और भारत की आजादी के बाद दोनों देशों के बीच इसी करार के जारी रहने पर सहमति बनी।”
- “जवाहर लाल नेहरू ने इस बारे में चीन के प्रीमियर चाउ एन लाई को लेटर भी लिखा था। इंडियन एम्बेसी द्वारा चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री को भेजे गए डिप्लोमैटिक नोट्स में इनका जिक्र है। सीमा विवाद पर दोनों देशों के रिप्रेजेंटेटिव्स के बीच बातचीत में भी यह मुद्दा उठता आया है।”
2) भारत घुसपैठ के लिए जिम्मेदार
- चीन ने बयान में कहा, “18 जून को भारत ने सिक्किम सेक्टर से चीन के इलाके में घुसपैठ की। यहां बॉर्डर बिल्कुल तय हैं। इंडियन ट्रूप्स का बॉर्डर क्रॉस करके हमारे इलाके में आना बहुत सीरियस मामला है। ये तीन की सोवरिनिटी (संप्रभुता) और उसकी अखंडता से छेड़छाड़ है।”
- “1890 का कन्वेंशन सिटीजन चार्टर और इंटरनेशनल लॉ के बेसिक प्रिंसिपल्स पर बेस्ड है।”
3) रोड बनाना चीन का हक
- एक महीने से ज्यादा वक्त से जारी डोकलाम विवाद के बीच चीन ने कहा, “अपने इलाके मे रोड बनाना हमारा हक है। इससे लोकल ट्रांसपोर्टेशन को बेहतर किया जा सकता है। चीन ने सड़क बनाने के लिए कोई बॉर्डर क्रॉस नहीं की है। इसके बारे में भारत को पहले ही बता दिया गया था।”
- “इस तरह की हरकत (घुसपैठ) को सहन नहीं किया जा सकता। दोनों देशों को नॉर्मल तरीके से इस मामले का हल खोजना चाहिए। भारत को भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों और अपने नागरिकों के बारे में सोचना चाहिए।”
4) भारत की हरकतों से चीन को खतरा
- चीन ने दावा किया, “बीते कई साल से भारत डोकलाम के अपने हिस्से और दूसरे करीबी इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। यहां उसने मिलिट्री इन्सटॉलेशन्स भी बनाए हैं। भारत ने कई बार चीन की नॉर्मल पेट्रोलिंग में रुकावट डालने की कोशिश की है। इस बारे में हमारे ट्रूप्स ने विरोध भी दर्ज कराया है।”
- “हकीकत ये है कि भारत इस इलाके की बॉर्डर से छेड़छाड़ की कोशिश कर रहा है। खास तौर से सिक्किम के इलाके में भारत की हरकतों से चीन की सिक्युरिटी के लिए बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।”
5) मामला चीन-भूटान का, भारत दूर रहे
- चीन का कहना है, “चीन और भूटान के बीच बॉर्डर इश्यू है। लेकिन, भारत का इससे कोई ताल्लुक नहीं है। थर्ड पार्टी के तौर पर भारत को कोई हक नहीं कि वो चीन और भूटान के बीच किसी विवाद में दखल दे। भारत भूटान की तरफ से बात क्यों कर रहा है?”
- “भूटान की तरफ से भारत का इस मामले में दखल सिर्फ चीन की सोवरिनिटी का वॉयलेशन नहीं है। ये भूटान भूटान की संप्रभुता और आजादी में भी दखलंदाजी है। चीन और भूटान के बीच दोस्ताना रिश्ते हैं।”
मौजूदा विवाद क्या है?
- चीन सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में सड़क बना रहा है। डोकलाम के पठार में ही चीन, सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। भूटान और चीन इस इलाके पर दावा करते हैं। भारत भूटान का साथ देता है। भारत में यह इलाका डोकलाम और चीन में डोंगलाेंग कहलाता है।
- चीन ने जून की शुरुआत में यह सड़क बनाना शुरू किया। भारत ने विरोध जताया तो चीन ने घुसपैठ कर दी। चीन ने भारत के दो बंकर तोड़ दिए। तभी से तनाव है। 
- दरअसल, सिक्किम का मई 1975 में भारत में विलय हुआ था। चीन पहले तो सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इनकार करता था। लेकिन 2003 में उसने सिक्किम को भारत के राज्य का दर्जा दे दिया। हालांकि, सिक्किम के कई इलाकों को वह अपना बताता रहा है।

किस समझौते की वजह से है विवाद?
- विवाद की वजह 1890 का वह समझौता है, जो ब्रिटिश शासन ने चीन के चिंग राजवंश के साथ किया था। उसमें अलग-अलग जगहों पर बॉर्डर दिखाई गई थीं। उसके मुताबिक, एक बड़े हिस्से पर भूटान का कंट्रोल है, जहां भारत का उसे सपोर्ट और मिलिट्री कोऑपरेशन हासिल है।
- इसी समझौते के हिस्से में आने वाले डोकलाम के पठार पर भारत और चीन के जवान शून्य डिग्री से नीचे के तापमान में तैनात हैं। ये तैनाती नॉर्मल नहीं है। दोनों देश सैनिकों की वापसी पर अड़ गए हैं।
चीन को रोकना क्यों जरूरी है?
- चीन जहां सड़क बना रहा है, उसी इलाके में 20 किमी हिस्सा सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ता है। यह ‘चिकेन नेक’ भी कहलाता है। चीन का इस इलाके में दखल बढ़ा तो भारत की कनेक्टिविटी पर असर पड़ेगा। भारत के कई इलाके चीन की तोपों की रेंज में आ जाएंगे।
- अगर चीन ने सड़क को बढ़ाया तो वह न सिर्फ भूटान के इलाके में घुस जाएगा, बल्कि वह भारत के सिलीगुड़ी काॅरिडोर के सामने भी खतरा पैदा कर देगा। 
- दरअसल, 200 किमी लंबा और 60 किमी चौड़ा सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी राज्यों से जोड़ता है। इसलिए भारत नहीं चाहेगा कि यह चीन की जद में आए।